घर पर बनाएं बालों के लिए केमिकल फ्री Hair Gel+Conditioner 
Home made chemical free hair gel and conditioner

वैसे तो बालों की देखभाल के लिए आपको कई तरीके मिल जाएंगे, लेकिन किचन में मौजूद फ्लैक्स सीड (अलसी) से मिलने वाले फायदों का कोई जवाब नहीं है, इसे तैयार करना बेहद आसान है और इसके लिए आपके ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं होंगे, साथ ही ये हर तरह के बालों के लिए फायदेमंद है।

फ्लैक्स सीड या अलसी में न्यूट्रिएंट के तौर पर मौजूद ओमेगा-3 (Omega-3) जहां आपकी बालों को बढ़ने में मदद करता है, वहीं यह बालों को कंडीशन कर उन्हें चमकदार भी बनाता है, असल में, इस gel की मदद से आप बालों की स्टाइलिंग आसानी से कर सकते हैं, रूखे और बेजान से दिखने वाले बालों के लिए भी ये gel बहुत फायदेमंद है।

Hair Gel+Conditioner को तैयार करने का तरीका

  1. एक चौथाई कप अलसी या फ्लैक्स सीड लें और इसमें 2 कप पानी मिलाकर मीडियम आंच पर गर्म करें।
  2. जब ये उबलने लगे तो आंच को धीमी करते हुए 5 मिनट के लिए और उबालें।
  3. बीच-बीच में मिक्सचर को चलाते रहें। जब इसमें एक पतला जेली जैसा गाढ़ापन आ जाए तो आंच से उतार लें।
  4. आप चाहें तो इसमें अपनी पसंद का कोई एसेंशियल ऑयल मिला लें, ये आपके बालों को बढ़ने में मदद करने के साथ ही सिरदर्द से भी बचाएगा।
  5. मिक्सचर को अच्छी तरह छानकर एक एयर-टाइट कंटेनर में रखें।
  6. इसे आप फ्रिज में भी रख सकते हैं, इससे यह जल्दी खराब नहीं होगा। वैसे हमारी सलाह है कि इसे 2 हफ्तों के अंदर इस्तेमाल कर लें, क्योंकि इसके बाद इसके खराब होने की पूरी संभावना होती है

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वैसे तो ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है तो यहाँ हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है. आक-अर्क के पौधे, शुष्क, ऊसर और ऊँची भूमि में प्राय: सर्वत्र देखने को मिलते हैं.

इस वनस्पति के विषय में साधारण समाज में यह भ्रान्ति फेंली हुई है कि आक का पौधा विषेला होता है तथा यह मनुष्य के लिये घातक है. इसमें किंचित सत्य जरूर है क्योकि आयुर्वेद संहिताओं मे भी इसकी गणना उपविषों में की गई है. यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, उलटी दस्त होकर मनुष्य यमराज के घर जा सकता है.

इसके विपरीत यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, योग्य तरीके से, चतुर वैद्य की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों में इससे बडा फायदा होता है. इसका हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है एवं यह सूर्य के समान तीक्ष्य. तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायन धर्मा हैं। अकौआ एक औषधीय पादप है। इसको मदार, मंदार, आक, अर्क भी कहते हैं. इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है. पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं. हरे सफेदी लिये पत्ते पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं. इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है. फूल पर रंगीन चित्तियाँ होती हैं. फल आम के तुल्य होते हैं जिनमें रूई होती है. आक की शाखाओं में दूध निकलता है. वह दूध विष का काम देता है. आक गर्मी के दिनों में रेतिली भूमि पर होता है. चौमासे में पानी बरसने पर सूख जाता है.
  • आक के पौधे की पत्ती को उल्टा (उल्टा का मतलब पत्ते का खुदरा भाग) कर के पैर के तलवे से सटा कर मोजा पहन लें. सुबह और पूरा दिन रहने दे रात में सोते समय निकाल दें. एक सप्ताह में आपका शुगर लेवल सामान्य हो जायेगा. साथ ही बाहर निकला पेट भी कम हो जाता है.
  • आक का हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है. यह सूर्य के समान तीक्ष्ण तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायनधर्मा हैं. कहीं-कहीं इसे 'वानस्पतिक पारद' भी कहा गया है. आक के कोमल पत्ते मीठे तेल में जला कर अण्डकोश की सूजन पर बाँधने से सूजन दूर हो जाती है. तथा कडुवे तेल में पत्तों को जला कर गरमी के घाव पर लगाने से घाव अच्छा हो जाता है.
  • इसके कोमल पत्तों के धुंए से बवासीर शाँत होती है. आक के पत्तों को गरम करके बाँधने से चोट अच्छी हो जाती है. सूजन दूर हो जाती है. आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिला ले और छोटी छोटी गोलियाँ बना कर खाने से खाँसी दूर होती है.
  • आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है. आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे शिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है.
  • आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है. आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है. उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये. आक ही के काडे से घाव धोवे.
  • आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है. आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.
  • आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है. बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है.
  • आक का दूध पाँव के अँगूठे पर लगाने से दुखती हुई आँख अच्छी हो जाती है. बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से जाते रहते हैं. बर्रे काटे में लगाने से दर्द नहीं होता. चोट पर लगाने से चोट शाँत हो जाती है.
नोट : जहाँ के बाल उड़ गये हों वहाँ पर आक का दूध लगाने से बाल उग आते हैं. लेकिन ध्यान रहे इसका दूध आँख में नहीं जाना चाहिए वर्ना आँखें खराब हो जाती है. उपरोक्त कोई भी उपाय अपनी ज़िम्मेदारी पर सावधानी से ही करें।

फिटकरी के चमत्कारिक फायदे 
Benefits of Alum

फिटकरी को लोग सालों से काम में लेते आए हैं। फिटकरी आमतौर पर सब घरों में प्रयोग होती है, फिटकरी का इस्तमाल खासतौर से बारिश के मौसम में पानी को साफ करने के लिए किया जाता है। फिटकरी लाल व सफेद दो प्रकार की होती है। अधिकतर सफेद फिटकरी का प्रयोग ही किया जाता है।

फिटकरी के खास गुण / फिटकरी की उपयोग विधि

  1. जिन लोगो को शरीर से ज्यादा पसीना आने की समस्या हो तो वो लोग नहाते समय पानी में फिटकरी को घोलकर नहाने से पसीना आना कम हो जाता है। फिटकरी के पानी से योनि को सुबह-शाम नियमित धोएं। पंसारी से संगे जराहत और फिटकरी लेकर दोनों पीस लें और इस आधा ग्राम चूर्ण की फंकी ताजे पानी के साथ या गाय के दूध के साथ सुबह, दोपहर और शाम दिन में तीन बार लें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से अवश्य लाभ होगा।
  2. यदि चोट या खरोंच लगकर घाव हो गया हो और उससे खून बह रहा हो घाव को फिटकरी के पानी से धोएं तथा घाव पर फिटकरी का चूर्ण बनाकर बुरकने से खून बहना बंद हो जाता है।
  3. फिटकरी और काली मिर्च पीसकर दांतों की जड़ों में मलने से दांतों की पीड़ा में लाभ होते है।
  4. सेविंग करने के बाद चेहरे पर फिटकरी लगाने से चेहरा मुलायम हो जाता है।
  5. आधा ग्राम पिसी हुई फिटकरी को शहद में मिलाकर चाटने से दमा और खांसी में बहुत लाभ मिलता है।
  6. भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ लेने से खून की उल्टी बंद हो जाती है।
  7. दांत दर्द से बचने के लिए फिटकरी और काली मिर्च को पीसकर दांतों की जड़ों में मलने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है।
  8. फुलाई हुई फिटकरी एक तोला और मिश्री दो तोला दोनों को महीन पीसकर रख लें। एक-एक माशा नित्य सवेरे खाने से दमा के रोग में लाभ होता है।
  9. प्रतिदिन दोनों समय फिटकरी को गर्म पानी में घोलकर कुल्ला करें ,इससे दांतों के कीड़े तथा मुंह की बदबू दूर हो जाती है ।
  10. डेढ़ ग्राम फिटकरी पाउडर को फांककर ऊपर से दूध पीने से चोट लगने से होने वाला दर्द दूर हो होता हैं।
  11. टांसिल की समस्या होने पर गर्म पानी में चुटकी भर फिटकरी और नमक डालकर गरारे करें। इससे टांसिल की समस्या में जल्दी ही आराम मिल जाता है।
  12. दस्त और पेचिश की परेशानी से बचने के लिए थोड़ी फिटकरी को बारीक पीसकर भून लें और अब इस भुनी हुई फिटकरी को गुलाब जल के साथ मिलाकर पीने से खूनी दस्त आना बंद हो जाता है।
  13. एक लीटर पानी में 10 ग्राम फिटकरी का चूर्ण घोल लें। इस घोल से प्रतिदिन सिर धोने से जुएं मर जाती हैं।
  14. दस ग्राम फिटकरी के चूर्ण में पांच ग्राम सेंधा नमक मिलाकर मंजन बना लें। इस मंजन के प्रतिदिन प्रयोग से दांतो के दर्द में आराम मिलता है ।
  15. भुनी हुई फिटकरी एक तोला, भुना हुआ तूतिया छह माशा, कत्छा एक तोला, इन सबको कूट पीसकर मंजन बनाकर लगाने से दांतों की पीड़ा दूर होती है और दांत मजबूत तथा सुदृढ़ होते हैं।
  16. कान में फुंसी हो अथवा मवाद आता हो तो एक प्याले में थोड़ी-सी फिटकरी पीसकर पानी डालकर घोलें और पिचकारी द्वारा कान धोएं।
  17. शहद में फिटकरी मिलाकर आंखों में डालने से आंखों की लाली समाप्त हो जाती है।
  18. खुजली वाली जगह को फिटकरी वाले पानी से धोएं और बाद में उस जगह पर थोड़ा-सा कड़वा तेल लगा लें। उस पर थोड़ा-सा कपूर भी डाल लें।
  19. एक लीटर पानी में बीस ग्राम फिटकरी को घोल के दिन में दो या तीन बार सफ़ेद पानी की शिकायत होने पर गुप्तांग को घोने से एवं एक ग्राम फिटकरी को एक पके केले में चीर भर के सात दिन खाने से आराम होता है।
  20. गर्भपात : पिसी हुई फिटकरी चौथाई चम्मच एक कप कच्चे दूध में डालकर लस्सी बनाकर पिलाने से गर्भपात रुक जाता है। गर्भपात के समय दर्द, रक्तस्राव हो रहा हो तो हर दो-दो घंटे से एक-एक खुराक दें।
  21. बांझपन : मासिक-धर्म ठीक होने पर भी यदि सन्तान न होती हो तो रूई के फाये में फिटकरी लपेटकर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह निकालने पर रूई में दूध की खुर्चन सी जमा होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खुर्चन आती रहे। जब खुर्चन आना बंद हो जाए तो समझना चाहिए कि बांझपन रोग समाप्त हो गया है।
  22. योनि संकोचन : बांझपन की तरह योनि में रूई का फाया रखें तथा फिटकरी पानी में घोलकर योनि को दिन में तीन बार धोएं। इससे योनि सिकुड़कर सख्त हो जाएगी और योनि का ढीलापन समाप्त हो जाएगा। फिटकरी 30 ग्राम और 10 ग्राम माजूफल को लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस चूर्ण को मलमल के कपड़े में डालकर पोटली बनाकर सोने से पहले रात को योनि में रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर सिकुड़ जाती है। 2 ग्राम फिटकरी को 80 मिलीलीटर पानी में घोलकर योनि को धोने से योनि की आकृति कम यानी योनि सिकुड़ने लगती है।
  23. कान में चींटी चली जाने पर : कान में चींटी चली जाने पर कान में सुरसरी हो तो फिटकरी को पानी में घोलकर पीने से लाभ मिलता है।