टेंशन और हाईब्लडप्रेशर का इलाज



कान्स्टीपेशन, तनाव, हाई ब्लडप्रेशर ये बीमारियां आजकल आम हो चली है। अधिकांशत: इन बीमारियों के उपचार के लिए लोग नियमित रूप से दवाईयों का सेवन करते हैं। लेकिन ये बीमारियां ऐसी हैं जिन्हें दवाईयों से जड़ से मिटाना थोड़ा मुश्किल है। कहते हैं जिन रोगों को सिर्फ औषधीयों से नहीं मिटा जा सकता है उनका उपचार योग व ध्यान से संभव है। इसीलिए कान्स्टीपेशन, तनाव या हाई ब्लडप्रेशर को जड़ से मिटाने के लिए सिर्फ रोज दो मिनट के लिए नीचे लिखी विधि से ध्यान करें।
  1. ध्यान विधि- शरीर को ढीला छोड़ दीजिए. ध्यान रहे कमर झुकनी नहीं चाहिए।
  2. बंद आंखों से अपना पूरा ध्यान मूलाधार क्षेत्र में ले आइए।
  3. पूरा ध्यान बंद आंखों से वहीं एक जगह पर केन्द्रित करिए, गुदा द्वार को ढीला छोड़ दीजिए।
  4. लिंगमूल को ढीला छोड़ दीजिए।
  5. इससे सांस की गति अचनाक गहरी और तीव्र हो जाएगी।
  6. अपने सांस पर ध्यान दीजिए।
  7. अब अपना पूरा ध्यान नासिका पर ले आइए।
  8. इसके बाद अपनी सांस को गौर से देखिए।
  9. कम से कम 3० सांस तक आप इसी अवस्था में रहें।
  10. अब देखिए ध्यान में जाने से पहले और अब में कितना फर्क पड़ा है।
  11. इस विधि को दिन में जितनी बार चाहें दोहरा सकते हैं।

जीवन जीने की कला योग है




दोस्तों , आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अनेक ऐसे पल हैं जो हमारी स्पीड पर ब्रेक लगा देते हैं। हमारे आस-पास ऐसे अनेक कारण विद्यमान हैं जो तनाव, थकान तथा चिड़चिड़ाहट को जन्म देते हैं, जिससे हमारी जिंदगी अस्त-व्यस्त हो जाती है। ऐसे में जिंदगी को स्वस्थ तथा ऊर्जावान बनाये रखने के लिये योग एक ऐसी रामबाण दवा है जो, माइंड को कूल तथा बॉडी को फिट रखता है। योग से जीवन की गति को एक संगीतमय रफ्तार मिल जाती है।
योग हमारी भारतीय संस्कृति की प्राचीनतम पहचान है। संसार की प्रथम पुस्तक ऋग्वेद में कई स्थानों पर यौगिक क्रियाओं के विषय में उल्लेख मिलता है। भगवान शंकर के बाद वैदिक ऋषि-मुनियों से ही योग का प्रारम्भ माना जाता है। बाद में कृष्ण, महावीर और बुद्ध ने इसे अपनी तरह से विस्तार दिया। इसके पश्चात पतंजली ने इसे सुव्यवस्थित रूप दिया।
पतंजली योग दर्शन के अनुसार – योगश्चित्तवृत्त निरोधः अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है।
योग धर्म, आस्था और अंधविश्वास से परे एक सीधा विज्ञान है… जीवन जीने की एक कला है योग। योग शब्द के दो अर्थ हैं और दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।
पहला है- जोड़ और दूसरा है समाधि।
जब तक हम स्वयं से नहीं जुड़ते, समाधि तक पहुँचना कठिन होगा अर्थात जीवन में सफलता की समाधि पर परचम लहराने के लिये तन, मन और आत्मा का स्वस्थ होना अति आवश्यक है और ये मार्ग और भी सुगम हो सकता है, यदि हम योग को अपने जीवन का हिस्सा बना लें। योग विश्वास करना नहीं सिखाता और न ही संदेह करना और विश्वास तथा संदेह के बीच की अवस्था संशय के तो योग बिलकुल ही खिलाफ है। योग कहता है कि आपमें जानने की क्षमता है, इसका उपयोग करो।
अनेक सकारात्मक ऊर्जा लिये योग का गीता में भी विशेष स्थान है। भगवद्गीता के अनुसार –
सिद्दध्यसिद्दध्यो समोभूत्वा समत्वंयोग उच्चते : अर्थात् दुःख-सुख, लाभ-अलाभ, शत्रु-मित्र, शीत और उष्ण आदि द्वन्दों में सर्वत्र समभाव रखना योग है।
महात्मा गांधी ने अनासक्ति योग का व्यवहार किया है। योगाभ्यास का प्रामाणिक चित्रण लगभग 3000 ई.पू. सिन्धु घाटी सभ्यता के समय की मोहरों और मूर्तियों में मिलता है। योग का प्रामाणिक ग्रंथ ‘योग सूत्र’ 200 ई.पू. योग पर लिखा गया पहला सुव्यवस्थित ग्रंथ है।
ओशो के अनुसार, ‘योग धर्म, आस्था और अंधविश्वास से परे एक सीधा प्रायोगिक विज्ञान है। योग जीवन जीने की कला है। योग एक पूर्ण चिकित्सा पद्धति है। एक पूर्ण मार्ग है-राजपथ। दरअसल धर्म लोगों को खूँटे से बाँधता है और योग सभी तरह के खूँटों से मुक्ति का मार्ग बताता है।’
प्राचीन जीवन पद्धति लिये योग, आज के परिवेश में हमारे जीवन को स्वस्थ और खुशहाल बना सकते हैं। आज के प्रदूषित वातावरण में योग एक ऐसी औषधि है जिसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है, बल्कि योग के अनेक आसन जैसे कि, शवासन हाई ब्लड प्रेशर को सामान्य करता है, जीवन के लिये संजीवनी है कपालभाति प्राणायाम, भ्रामरी प्राणायाम मन को शांत करता है, वक्रासन हमें अनेक बीमारियों से बचाता है। आज कंप्यूटर की दुनिया में दिनभर उसके सामने बैठ-बैठे काम करने से अनेक लोगों को कमर दर्द एवं गर्दन दर्द की शिकायत एक आम बात हो गई है, ऐसे में शलभासन तथा तङासन हमें दर्द निवारक दवा से मुक्ति दिलाता है। पवनमुक्तासन अपने नाम के अनुरूप पेट से गैस की समस्या को दूर करता है। गठिया की समस्या को मेरूदंडासन दूर करता है। योग में ऐसे अनेक आसन हैं जिनको जीवन में अपनाने से कई बीमारियां समाप्त हो जाती हैं और खतरनाक बीमारियों का असर भी कम हो जाता है। 24 घंटे में से महज कुछ मिनट का ही प्रयोग यदि योग में उपयोग करते हैं तो अपनी सेहत को हम चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं। फिट रहने के साथ ही योग हमें पॉजिटिव एर्नजी भी देता है। योग से शरीर में रोग प्रतिरोध क्षमता का विकास होता है।
ये कहना अतिश्योक्ति न होगा कि, योग हमारे लिये हर तरह से आवश्यक है। यह हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है। योग के माध्यम से आत्मिक संतुष्टि, शांति और ऊर्जावान चेतना की अनुभूति प्राप्त होती है, जिससे हमारा जीवन तनाव मुक्त तथा हर दिन सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढता है। हमारे देश की ऋषि परंपरा योग को आज विश्व भी अपना रहा है। जिसका परिणाम है कि 21 जून को अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस ( International Yoga Day ) मनाये जाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा रखे गये प्रस्ताव को 177 देशो ने अत्यंत सीमित समय में पारित कर दिया l और आज 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस / First International Yoga Day पूरी दुनिया मे बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है ।
मित्रों, आज जिस तरह का खान-पान और रहन-सहन हो गया है, ऐसे में हम सब योग को अपनायें और अपने भारतीय गौरव को एक स्वस्थ पैगाम से गौरवान्वित करें।
गीता में लिखा है , “योग स्वयं की स्वयं के माध्यम से स्वयं तक पहुँचने की यात्रा है। “

20 घरेलू नुस्खे जो आपको रखेंगे सभी रोगों से दूर 
Tips to be Safe from all Disease

  1. प्याज के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
  2. प्रतिदिन 1 अखरोट और 10 किशमिश बच्चों को खिलाने से बिस्तर में पेशाब करने की समस्या दूर होती है।
  3. टमाटर के सेवन से चिढ़ चिढ़ापन और मानसिक कमजोरी दूर होती है।यह मानसिक थकान को दूर कर मस्तिस्क को तंदरुस्त बनाये रखता है। इसके सेवन से दांतो व् हड्डियों की कमजोरी भी दूर होती है.
  4. तुलसी के पत्तो का रस,अदरख का रस और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1चम्मच की मात्रा में दिन में 3 से 4 बार सेवन करने से सर्दी, जुखाम व खांसी दूर होती है।
  5. चाय की पट्टी की जगह तेज पत्ते की चाय पीने से सर्दी, जुखाम, छींके आना, नाक बहना ,जलन व सरदर्द में शीघ्र आराम मिलता है।
  6. रोज सुबह खाली पेट हल्का गर्म पानी पीने से चेहरे में रौनक आती है वजन कम होता है, रक्त प्रवाह संतुलित रहता है और गुर्दे ठीक रहते है।
  7. पांच ग्राम दालचीनी ,दो लवंग और एक चौथाई चम्मच सौंठ को पीसकर 1 लीटर पानी में उबाले जब यह 250 ग्राम रह जाए तब इसे छान कर दिन में 3 बार पीने से वायरल बुखार में आराम मिलता है।
  8. पान के हरे पत्ते के आधे चम्मच रस में 2 चम्मच पानी मिलाकर रोज नाश्ते के बाद पीने सेपेट के घाव व अल्सर में आराम मिलता है।
  9. मूंग की छिलके वाली दाल को पकाकर यदि शुद्ध देशी घी में हींग-जीरे का तड़का लगाकर खाया जाए तो यह वात, पित्त, कफ तीनो दोषो को शांत करती है।
  10. भोजन में प्रतिदिन 20 से 30 प्रतिशत ताजा सब्जियों का प्रयोग करने से जीर्ण रोग ठीक होता है उम्र लंबी होती है शरीर स्वस्थ रहता है।
  11. भिन्डी की सब्जी खाने से पेशाब की जलन दूर होती है तथा पेशाब साफ़ और खुलकर आता है।
  12. दो तीन चम्मच नमक कढ़ाई में अच्छी तरह सेक कर गर्म नमक को मोटे कपडे की पोटली में बांधकर सिकाई करने से कमर दर्द में आराम मिलता है।
  13. हरी मिर्च में एंटी आक्सिडेंट होता है जो की शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और कैंसर से लड़ने में मदद करता है इसमें विटामिन c प्रचुर मात्रा में होता है जो की प्राकृतिक प्रतिरक्षा में सुधार करता है।
  14. मखाने को देसी घी में भून कर खाने से दस्तो में बहुत लाभ होता है इसके नियमित सेवन से रक्त चाप , कमर दर्द, तथा घुटने के दर्द में लाभ मिलता है।
  15. अधिक गला ख़राब होने पर 5 अमरुद के पत्ते 1 गिलास पानी में उबाल कर थोड़ी देर आग पर पका ठंडा करके दिन में 4 से 5 बार गरारे करने से शीघ्र लाभ होता है।
  16. आधा किलो अजवाइन को 4 लीटर पान में उबाले 2 लीटर पानी बचने पर छानकर रखे, इसे प्रतिदिन भोजन के पहले 1 कप पीने से लिवर ठीक रहता है एवं शराब पीने की इच्छा नहीं होती.।
  17. नीम की पत्तियो को छाया में सुखा कर पीस लें, इस चूर्ण में बराबर मात्रा में कत्थे का चूर्ण मिला ले। इस चूर्ण को मुह के छालो पर लगाकर टपकाने से छाले ठीक होते है।
  18. प्रतिदिन सेब का सेवन करने से ह्रदय,मस्तिस्क तथा आमाशय को समान रूप से शक्ति मिलती है तथा शरीर की कमजोरी दूर होती है।
  19. 20से 25 किशमिश चीनी मिटटी के बर्तन में रात को भिगो कर रख दें।सुबह इन्हें खूब चबा कर खाने से लो ब्लड प्रेसर में लाभ मिलता है व शरीर पुष्ट होता है।
  20. अमरुद में काफी पोषक तत्व होते है .इसके नियमित सेवन से कब्ज दूर होती है और मिर्गी, टाईफाइड , और पेट के कीड़े समाप्त होते है।

हिलते दाँतों के लिए घरेलु आयुर्वेदिक उपाय 
Ayurvedic tretment for moving teeth

यह समस्या दांतों को बहुत ज्यादा रगड़ने, गम क्लीनिंग, उम्र बढ़ने, मौखिक स्वच्छता की कमी, मसूड़ों के जीवाणु संक्रमण के कारण हो सकती है। अगर आपके दांतों में भी भोजन के दौरान दर्द और छूने पर ऐसा महसूस होता है कि दांत हिल रहा है तो समझ लीजिए कि आपको पैरीयोडोंटम समस्या हो गई है। लेकिन घबराएं नहीं क्योंकि कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर आसान से इसका उपचार हो सकता है।

घरेलू उपाय

  • काली मिर्च और हल्दी का जादू : इन दोनों मसालों के मिश्रण से मसूड़ों को मजबूत बनाया जाता है। समस्या होने पर काली मिर्च और हल्दी की जड़ को पीसकर, उसका गाढ़ा सा पेस्ट बनाना लें। इस पेस्ट को हिलते दांत वाली जगह पर 30 मिनट के लिए लगाकर छोड़ दें। या फिर दो से तीन मिनट अपने दांतों में इस पेस्ट से मसाज करें। इस उपाय से दांतों के हिलने के साथ-साथ दांतों का दर्द भी दूर हो जाएगा। समस्या दूर होने तक इस उपाय को नियमित रूप से करें।
  • पुदीने का तेल : पुदीने के तेल में दांतों की समस्याओं को दूर करने वाले एंटीबैक्टीरियल और एंटीमाइक्रोबैक्टीरियल गुण होते हैं। यह दांतों के हिलने की समस्या को भी दूर करने में आपकी मदद करता है। तेल को उंगली में लेकर हिलते दांत पर अच्छे से लगाकर मसाज करें। इसके अलावा राहत पाने के लिए तेल को पानी में मिलाकर इसे कुल्ला करने के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • सरसों का तेल और नमक : प्राचीन काल से ही दांतों को जड़ से मजबूत करने के लिए सरसों के तेल में नमक मिलाकर प्रयोग किया जाता है। नियमित रूप से सुबह उठकर नमक और सरसों का तेल मिलाकर इससे दांत साफ करें और दर्द वाली जगह पर इस पेस्ट को लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। इस उपाय से आपको जल्द ही आराम मिलने लगेगा।
  • आंवला : आंवला अपने कई लाभकारी गुणों के लिए जाना जाता है। विशेषकर इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन सी की मौजूदगी दांतो की पकड़ को मजबूत करती है। साथ ही यह संयोजी ऊतक को ठीक होने में मदद करता है। हिलते दांत में आवंला जूस काफी आराम देता है। आप चाहें तो आंवला रस से कुल्ला कर लें या इसे पी लें।
  • लौंग के तेल के प्रयोग : लौंग का तेल मसूड़ों की सूजन और दांत दर्द को नियंत्रित करने का बहुत ही अच्छा प्राकृतिक उपचार है। लौंग के तेल का उपयोग पुदीना तेल के समान होता है। सूजन को नियंत्रित करने और राहत पाने के लिए इसका इस्तेमाल प्रभावित क्षेत्र पर मसाज करने के लिए किया जाता है। अगर दांत ज्यादा हिलते हैं तो लौंग तेल को हिलते दांत पर लगाएं और मसाज करें। या रात को लगाकर छोड़ दें। इससे काफी राहत मिलती है।
  • अजवायन की पत्तियों का तेल : आजवाइन की पत्ती का तेल, हिलते दांत में काफी फायदेमंद होता है। इसे दांतों पर लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। इससे दांतों को गर्मी मिलती है और हिलते दांत में राहत हो जाती है। इसके अलावा सूजन और दर्दनाक मसूड़ों के लिए आप अजवायन की पत्तियों का सहारा ले सकते हैं। ये सूजन को कम करने में मदद कर आपको राहत प्रदान करता है।
  • नमक का प्रयोग करें : नमक मौखिक स्वास्थ्य से लिए बहुत ही लाभकारी होता है। इसमें मौजूद सौम्य एंटीसेप्टिक गुणों के कारण यह मुंह में होने वाले संक्रमण से राहत देने में मदद करता है। समस्या होने पर एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर, इस पानी से मुंह में कुल्ला करें। या सूजन को कम करने के लिए गम पर मालिश करें। इससे दांतों के सारे जर्म मर जाएंगे और आपका मुंह एकदम साफ हो जाएगा।

घर पर बनाएं बालों के लिए केमिकल फ्री Hair Gel+Conditioner 
Home made chemical free hair gel and conditioner

वैसे तो बालों की देखभाल के लिए आपको कई तरीके मिल जाएंगे, लेकिन किचन में मौजूद फ्लैक्स सीड (अलसी) से मिलने वाले फायदों का कोई जवाब नहीं है, इसे तैयार करना बेहद आसान है और इसके लिए आपके ज्यादा पैसे भी खर्च नहीं होंगे, साथ ही ये हर तरह के बालों के लिए फायदेमंद है।

फ्लैक्स सीड या अलसी में न्यूट्रिएंट के तौर पर मौजूद ओमेगा-3 (Omega-3) जहां आपकी बालों को बढ़ने में मदद करता है, वहीं यह बालों को कंडीशन कर उन्हें चमकदार भी बनाता है, असल में, इस gel की मदद से आप बालों की स्टाइलिंग आसानी से कर सकते हैं, रूखे और बेजान से दिखने वाले बालों के लिए भी ये gel बहुत फायदेमंद है।

Hair Gel+Conditioner को तैयार करने का तरीका

  1. एक चौथाई कप अलसी या फ्लैक्स सीड लें और इसमें 2 कप पानी मिलाकर मीडियम आंच पर गर्म करें।
  2. जब ये उबलने लगे तो आंच को धीमी करते हुए 5 मिनट के लिए और उबालें।
  3. बीच-बीच में मिक्सचर को चलाते रहें। जब इसमें एक पतला जेली जैसा गाढ़ापन आ जाए तो आंच से उतार लें।
  4. आप चाहें तो इसमें अपनी पसंद का कोई एसेंशियल ऑयल मिला लें, ये आपके बालों को बढ़ने में मदद करने के साथ ही सिरदर्द से भी बचाएगा।
  5. मिक्सचर को अच्छी तरह छानकर एक एयर-टाइट कंटेनर में रखें।
  6. इसे आप फ्रिज में भी रख सकते हैं, इससे यह जल्दी खराब नहीं होगा। वैसे हमारी सलाह है कि इसे 2 हफ्तों के अंदर इस्तेमाल कर लें, क्योंकि इसके बाद इसके खराब होने की पूरी संभावना होती है

मधुमेह या डायबिटीज़ के लिए संजीवनी बूटी 
Aayurved Best Treatment for Diabities

वैसे तो ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है तो यहाँ हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है. आक-अर्क के पौधे, शुष्क, ऊसर और ऊँची भूमि में प्राय: सर्वत्र देखने को मिलते हैं.

इस वनस्पति के विषय में साधारण समाज में यह भ्रान्ति फेंली हुई है कि आक का पौधा विषेला होता है तथा यह मनुष्य के लिये घातक है. इसमें किंचित सत्य जरूर है क्योकि आयुर्वेद संहिताओं मे भी इसकी गणना उपविषों में की गई है. यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तो, उलटी दस्त होकर मनुष्य यमराज के घर जा सकता है.

इसके विपरीत यदि आक का सेवन उचित मात्रा में, योग्य तरीके से, चतुर वैद्य की निगरानी में किया जाये तो अनेक रोगों में इससे बडा फायदा होता है. इसका हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है एवं यह सूर्य के समान तीक्ष्य. तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायन धर्मा हैं। अकौआ एक औषधीय पादप है। इसको मदार, मंदार, आक, अर्क भी कहते हैं. इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार होता है. पत्ते बरगद के पत्तों समान मोटे होते हैं. हरे सफेदी लिये पत्ते पकने पर पीले रंग के हो जाते हैं. इसका फूल सफेद छोटा छत्तादार होता है. फूल पर रंगीन चित्तियाँ होती हैं. फल आम के तुल्य होते हैं जिनमें रूई होती है. आक की शाखाओं में दूध निकलता है. वह दूध विष का काम देता है. आक गर्मी के दिनों में रेतिली भूमि पर होता है. चौमासे में पानी बरसने पर सूख जाता है.
  • आक के पौधे की पत्ती को उल्टा (उल्टा का मतलब पत्ते का खुदरा भाग) कर के पैर के तलवे से सटा कर मोजा पहन लें. सुबह और पूरा दिन रहने दे रात में सोते समय निकाल दें. एक सप्ताह में आपका शुगर लेवल सामान्य हो जायेगा. साथ ही बाहर निकला पेट भी कम हो जाता है.
  • आक का हर अंग दवा है, हर भाग उपयोगी है. यह सूर्य के समान तीक्ष्ण तेजस्वी और पारे के समान उत्तम तथा दिव्य रसायनधर्मा हैं. कहीं-कहीं इसे 'वानस्पतिक पारद' भी कहा गया है. आक के कोमल पत्ते मीठे तेल में जला कर अण्डकोश की सूजन पर बाँधने से सूजन दूर हो जाती है. तथा कडुवे तेल में पत्तों को जला कर गरमी के घाव पर लगाने से घाव अच्छा हो जाता है.
  • इसके कोमल पत्तों के धुंए से बवासीर शाँत होती है. आक के पत्तों को गरम करके बाँधने से चोट अच्छी हो जाती है. सूजन दूर हो जाती है. आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिला ले और छोटी छोटी गोलियाँ बना कर खाने से खाँसी दूर होती है.
  • आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है. आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे शिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है.
  • आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है. आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है. उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये. आक ही के काडे से घाव धोवे.
  • आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है. आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.
  • आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है. बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है.
  • आक का दूध पाँव के अँगूठे पर लगाने से दुखती हुई आँख अच्छी हो जाती है. बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से जाते रहते हैं. बर्रे काटे में लगाने से दर्द नहीं होता. चोट पर लगाने से चोट शाँत हो जाती है.
नोट : जहाँ के बाल उड़ गये हों वहाँ पर आक का दूध लगाने से बाल उग आते हैं. लेकिन ध्यान रहे इसका दूध आँख में नहीं जाना चाहिए वर्ना आँखें खराब हो जाती है. उपरोक्त कोई भी उपाय अपनी ज़िम्मेदारी पर सावधानी से ही करें।

फिटकरी के चमत्कारिक फायदे 
Benefits of Alum

फिटकरी को लोग सालों से काम में लेते आए हैं। फिटकरी आमतौर पर सब घरों में प्रयोग होती है, फिटकरी का इस्तमाल खासतौर से बारिश के मौसम में पानी को साफ करने के लिए किया जाता है। फिटकरी लाल व सफेद दो प्रकार की होती है। अधिकतर सफेद फिटकरी का प्रयोग ही किया जाता है।

फिटकरी के खास गुण / फिटकरी की उपयोग विधि

  1. जिन लोगो को शरीर से ज्यादा पसीना आने की समस्या हो तो वो लोग नहाते समय पानी में फिटकरी को घोलकर नहाने से पसीना आना कम हो जाता है। फिटकरी के पानी से योनि को सुबह-शाम नियमित धोएं। पंसारी से संगे जराहत और फिटकरी लेकर दोनों पीस लें और इस आधा ग्राम चूर्ण की फंकी ताजे पानी के साथ या गाय के दूध के साथ सुबह, दोपहर और शाम दिन में तीन बार लें। कुछ ही दिनों के प्रयोग से अवश्य लाभ होगा।
  2. यदि चोट या खरोंच लगकर घाव हो गया हो और उससे खून बह रहा हो घाव को फिटकरी के पानी से धोएं तथा घाव पर फिटकरी का चूर्ण बनाकर बुरकने से खून बहना बंद हो जाता है।
  3. फिटकरी और काली मिर्च पीसकर दांतों की जड़ों में मलने से दांतों की पीड़ा में लाभ होते है।
  4. सेविंग करने के बाद चेहरे पर फिटकरी लगाने से चेहरा मुलायम हो जाता है।
  5. आधा ग्राम पिसी हुई फिटकरी को शहद में मिलाकर चाटने से दमा और खांसी में बहुत लाभ मिलता है।
  6. भुनी हुई फिटकरी 1-1 ग्राम सुबह-शाम पानी के साथ लेने से खून की उल्टी बंद हो जाती है।
  7. दांत दर्द से बचने के लिए फिटकरी और काली मिर्च को पीसकर दांतों की जड़ों में मलने से दांतों का दर्द ठीक हो जाता है।
  8. फुलाई हुई फिटकरी एक तोला और मिश्री दो तोला दोनों को महीन पीसकर रख लें। एक-एक माशा नित्य सवेरे खाने से दमा के रोग में लाभ होता है।
  9. प्रतिदिन दोनों समय फिटकरी को गर्म पानी में घोलकर कुल्ला करें ,इससे दांतों के कीड़े तथा मुंह की बदबू दूर हो जाती है ।
  10. डेढ़ ग्राम फिटकरी पाउडर को फांककर ऊपर से दूध पीने से चोट लगने से होने वाला दर्द दूर हो होता हैं।
  11. टांसिल की समस्या होने पर गर्म पानी में चुटकी भर फिटकरी और नमक डालकर गरारे करें। इससे टांसिल की समस्या में जल्दी ही आराम मिल जाता है।
  12. दस्त और पेचिश की परेशानी से बचने के लिए थोड़ी फिटकरी को बारीक पीसकर भून लें और अब इस भुनी हुई फिटकरी को गुलाब जल के साथ मिलाकर पीने से खूनी दस्त आना बंद हो जाता है।
  13. एक लीटर पानी में 10 ग्राम फिटकरी का चूर्ण घोल लें। इस घोल से प्रतिदिन सिर धोने से जुएं मर जाती हैं।
  14. दस ग्राम फिटकरी के चूर्ण में पांच ग्राम सेंधा नमक मिलाकर मंजन बना लें। इस मंजन के प्रतिदिन प्रयोग से दांतो के दर्द में आराम मिलता है ।
  15. भुनी हुई फिटकरी एक तोला, भुना हुआ तूतिया छह माशा, कत्छा एक तोला, इन सबको कूट पीसकर मंजन बनाकर लगाने से दांतों की पीड़ा दूर होती है और दांत मजबूत तथा सुदृढ़ होते हैं।
  16. कान में फुंसी हो अथवा मवाद आता हो तो एक प्याले में थोड़ी-सी फिटकरी पीसकर पानी डालकर घोलें और पिचकारी द्वारा कान धोएं।
  17. शहद में फिटकरी मिलाकर आंखों में डालने से आंखों की लाली समाप्त हो जाती है।
  18. खुजली वाली जगह को फिटकरी वाले पानी से धोएं और बाद में उस जगह पर थोड़ा-सा कड़वा तेल लगा लें। उस पर थोड़ा-सा कपूर भी डाल लें।
  19. एक लीटर पानी में बीस ग्राम फिटकरी को घोल के दिन में दो या तीन बार सफ़ेद पानी की शिकायत होने पर गुप्तांग को घोने से एवं एक ग्राम फिटकरी को एक पके केले में चीर भर के सात दिन खाने से आराम होता है।
  20. गर्भपात : पिसी हुई फिटकरी चौथाई चम्मच एक कप कच्चे दूध में डालकर लस्सी बनाकर पिलाने से गर्भपात रुक जाता है। गर्भपात के समय दर्द, रक्तस्राव हो रहा हो तो हर दो-दो घंटे से एक-एक खुराक दें।
  21. बांझपन : मासिक-धर्म ठीक होने पर भी यदि सन्तान न होती हो तो रूई के फाये में फिटकरी लपेटकर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह निकालने पर रूई में दूध की खुर्चन सी जमा होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खुर्चन आती रहे। जब खुर्चन आना बंद हो जाए तो समझना चाहिए कि बांझपन रोग समाप्त हो गया है।
  22. योनि संकोचन : बांझपन की तरह योनि में रूई का फाया रखें तथा फिटकरी पानी में घोलकर योनि को दिन में तीन बार धोएं। इससे योनि सिकुड़कर सख्त हो जाएगी और योनि का ढीलापन समाप्त हो जाएगा। फिटकरी 30 ग्राम और 10 ग्राम माजूफल को लेकर अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इस चूर्ण को मलमल के कपड़े में डालकर पोटली बनाकर सोने से पहले रात को योनि में रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर सिकुड़ जाती है। 2 ग्राम फिटकरी को 80 मिलीलीटर पानी में घोलकर योनि को धोने से योनि की आकृति कम यानी योनि सिकुड़ने लगती है।
  23. कान में चींटी चली जाने पर : कान में चींटी चली जाने पर कान में सुरसरी हो तो फिटकरी को पानी में घोलकर पीने से लाभ मिलता है।

बालों को काला करने की प्राकृतिक डाई 
Home made of natural black hair dye

आजकल एक गंभीर समस्या जन्म ले रही है वो है बालों का सफ़ेद होना, जो अब एक नार्मल बात हो चुकी है, अगर आपके कुछ बाल सफ़ेद हो गए तो आप उनको काला करने के लिए केमिकल युक्त डाई का उपयोग करेंगे जो की बालो के लिए नुक़सान दायक होती है जिसके प्रभाव से बचे हुए काले बाल भी सफ़ेद हो जाते है और झड़ने लगते है। आपको अब हर बार डाई करने पर विवस होना पड़ेगा क्योंकि आपके सफ़ेद बाल आपकी सुंदरता पर सफ़ेद ग्रहण लगा देते है, ऐसे में आयर्वेद आपकी मदद कर सकता है, आपके काले व घने बालों के लिये आवँले का पाउडर और निम्बू सबसे अच्छा रहेगा। क्योंकि यह सफ़ेद बाल को सिर्फ काला करेंगे वरन् उनको मजबूत और बाकी बाल को सफ़ेद होने से बचाएंगे, अब बात आती है 5₹ में प्राकतिक घरेलु डाई कैसे? आइये बताते है आप पतंजलि स्टोर से 20₹ का आंवले के पावडर का डिब्बा लाइये जो आपको 5-6 महीने तक काम आएगा और 2-3 ₹ का एक निम्बू मिल जाता है अगर एक बार इस प्राकृतिक डाई का औसत खर्च देखे तो मात्र 5₹ का व्यय होगा। यह बालों के लिये किस तरह से प्रयोग करना है, वो आज हम आपको बताएंगे।

बाल सफेद होने का कारण

बाल सफ़ेद होने के कई कारण है जैसे खूब ज्यादा तनाव लेना, सही पोषण ना मिलना, बहुत ज्यादा जंक फूड खाना, बहुत ज्यादा साबुन, शैंपू और तेल का प्रयोग करना। कुल मिलाकर हमारा मॉडर्न लाइफस्टाइल ही इसके लिए जिम्मेदार है.

सामग्रियां (Ingredients)

  • सामग्री : नींबू, आँवला पाउडर, साफ पानी।
  • विधि : नींबू के रस में, 2 चम्मच पानी और 4 चम्मच आँवला पाउडर मिला कर पेस्ट बनाइये। 1 घंटे के लिये रख दें और फिर प्रयोग करें।
  • प्रयोग : इस पेस्ट को 20-25 मिनट के लिये बालों और जड़ों में लगाएं और फिर सिर धो लें, लेकिन उस दिन शैंपू का प्रयोग ना करें।

कृपया ध्यान रखे

बालों को धोते वक्त ध्यान रखें कि यह आपकी आंखों में ना जाए। इस पेस्ट को हफ्ते में हर चौथे दिन प्रयोग करें। ऐसा करने से आपके सारे सफेद बाल एक ही महीने में काले होने लगेगें। अगर हो सके तो, आयुर्वेदिक तेल, शैंपू और साबुन का ही प्रयोग करें। बालों के लिये असली आँवले का तेल प्रयोग करें।

पसीने की बदबू से बचने के उपाय 
Solution for The Stench of Sweat

गर्मियों में पसीने की समस्या होना आम बात है। पसीना आना स्वस्थ शरीर की निशानी है। पसीने से शरीर का वेंटिलेशन होता है और जब पसीना सूख जाता है तब ताजगी का एहसास होता है। लेकिन पसीने का अधिक आना भी नुकसानदायक होता है। अधिक पसीने की वजह से सबसे बड़ी समस्या आती है तन की दुर्गंध। जिससे अक्सर लोग परेशान होते हैं। अधिक पसीने से बचने के लिए आप कुछ आसान प्राकृतिक घरेलू उपायों को अपना सकते हो।

क्या आहार लेना चाहिए?

  • रोज सुबह ग्रीन टी को पीएं। यह पसीने को कम करती है।
  • दिन में रोज टमाटर का रस या सूप पीने से पसीने की दुर्गंध कम होती है।
  • आप अंगूर, बादाम और स्ट्राबेरी का सेवन न करें यह पसीने को बढ़ाने का काम करते हैं।

पसीने की बदबू को दूर करने के घरेलू उपाय

  1. आलू स्लाइस : आलू को काटकर इसका स्लाइस बना लें और शरीर के जिस भाग में अधिक पसीना आता हो वहां पर इसे मलें। यह उपाय पसीना कम कर देता है।
  2. बेकिंग सोडा : नहाने की बाल्टी में एक चुटकी बेकिंग सोड़ा मिलाकर उस पानी से स्नान करें। ऐसा नियमित करने से पसीना नहीं आता है।
  3. नींबू : नहाने की टब या बाल्टी में कुछ बूंदे नींबू की डालें और इस पानी से नहाएं। यह भी आपको पसीने की समस्या से दूर रखता है।
  4. बेलपत्र : शरीर पर बेलपत्र का लेप लगाने से पसीना नहीं आता है।
  5. पानी : जितना हो सकें पानी खूब पीएं। अधिक पानी पीने से पसीना तो निकलेगा ही लेकिन उससे आने वाली बदबू खत्म हो जाएगी।
  6. तेजपत्ता : तेजपत्तों को सुखा लें और इसे पीसकर इसका चूर्ण बना लें। अब पानी में इन पत्तों को उबाल लीजिए। और एक दिन ऐसे ही रहने दें। अब इस पानी से शरीर के उन हिस्सों की रोज सफाई करें जहां से पसीना अधिक निकलता है।
  7. अन्य उपाय :
    • नीम वाले साबुन से स्नान करे ।
    • टाइट या तंग कपड़े पहनने से शरीर से अधिक पसीना आता है। इसलिए अधिक तंग कपड़े न पहनें।
    • कड़ी धूप में जाने से बचें।
    • ढीले और सूती कपड़े पहनें।
    • सिंथेटिक कपड़ों को भी न पहनें।
    • गर्मियों के मौसम में मिलने वाले फलों का सेवन करें।
    • अधिक मसालेदार खाना-खाने से बचें।

बादाम के चमत्कारिक फायदे 
Benefits of Almond

बादाम के पेड़ पर्वतीय क्षेत्रों में अधिक पाये जाते हैं। इसके तने मोटे होते हैं। इसके पत्ते लम्बे, चौडे़ और मुलायम होते हैं। इसके फल के अंदर की मींगी को बादाम कहते हैं। बादाम के पेड़ एशिया में ईरान, ईराक, सउदी अरब, आदि देशों में अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। हमारे देश में जम्मू कश्मीर में इसके पेड़ पाये जाते हैं। इसका पेड़ बहुत बड़ा होता है। बादाम की दो जातियां होती हैं एक कड़वी तथा दूसरी मीठी। बादाम पौष्टिक होती है। बादाम का तेल भी निकाला जाता है। कड़वी बादाम हमें उपयोग में नहीं लानी चाहिए क्योंकि यह शरीर के लिए हानिकारक होती है।

मीठा बादाम

  • रंग : यह बाहर से लाल तथा अंदर से सफेद रंग का होता है।
  • स्वाद : यह मीठा और स्वादिष्ट होता है।
  • स्वरूप : बादाम के पेड़ बहुत ऊंचे होते हैं। इसके पेड़ अफगानिस्तान और मालद्वीप में अधिक पाये जाते है। इसके पत्ते लम्बे और गोल तथा फूल छोटे-छोटे होते हैं। इसके फल के अंदर जो बीज पाया जाता है उसे ही बादाम कहते हैं।
  • स्वभाव : यह गर्म होता है।
  • हानिकारक : यह शरीर में देर से पचता है।
  • दोषों को दूर करने वाला : शक्कर, मीठा बादाम के दोषों को दूर करता है।
  • तुलना : चिलगोजे से बादाम की तुलना की जा सकती है।
  • मात्रा : 1 ग्राम से 3 ग्राम तक।
  • गुण : यह दिमाग और शरीर को स्वस्थ, सुन्दर और बलवान बनाता है, आंखों की रोशनी को बढ़ाता है, स्वभाव और आवाज को विनम्र व कोमल बनाता है। इससे हृदय को लाभ मिलता है। इसके उपयोग से शरीर में गाढ़ा और पुष्ट वीर्य पैदा होता है, सूखी खांसी के लिए यह लाभदायक होता है, सूजन को मिटाता है, शरीर के मोटापे को बढ़ाता है और रोगों को दूर करता है।
  • कच्चा बादाम : यह दस्तावर है। इसमें भारीपन होता है। पित्त को उत्तेजित करता है। यह कफ और वायु की बीमारियों को खत्म करता है।
  • पक्का बादाम : पक्का बादाम मीठा और चिकना होता है। इससे वीर्य में वृद्धि होती है और वीर्य गाढ़ा होता है। यह कफ को पैदा करता है और रक्त पित्त और वातपित्त को समाप्त करता है।
  • सूखा बादाम : यह मीठा होता है और धातु में वृद्धि करता है। यह शरीर को सुन्दर व शक्तिशाली बनाता है, पित्त को उत्तेजित करता है तथा वात पित्त और कफ को नष्ट करता है।
  • बादाम का तेल : इससे पुरुषों की पौरुष शक्ति में वृद्धि होती है। यह दिमाग के सभी रोगों को दूर करके उसे मजबूत बनाता है। इससे चेहरा सुन्दर और चमकदार हो जाता है। यह प्रमेह उत्पन्न करता है एवं शीतलता प्रदान करता है।

कड़वा बादाम

  • रंग : कड़वा बादाम का रंग सुर्ख (हल्का लाल और पीलापन) और अंदर सफेद रंग का होता है।
  • स्वाद : कड़वा बादाम का स्वाद कड़वा होता है।
  • स्वरूप : कड़वा बादाम, बादाम की ही जाति है।
  • स्वभाव : कड़वा बादाम गर्म होता है।
  • हानिकारक : कड़वा बादाम का अधिक मात्रा में उपयोग आंतों के लिए हानि पहुंचाता है।
  • दोषों को दूर करने वाला : चीनी, मिश्री, मीठे बादाम का तेल, कड़वा बादाम के गुणों को सुरक्षित रखता है एवं कड़वा बादाम में सम्मिलित दोषों को दूर करता है।
  • तुलना : कड़वे बादाम की तुलना भी चिलगोजे से की जा सकती है।
  • मात्रा : 3 ग्राम।
  • गुण : कड़ुवा बादाम का प्रयोग सूजनों को ठीक करने में किया जाता है। यह शरीर के अंदर खराब खून को बिल्कुल साफ कर देता है जिससे चर्म रोगों (त्वचा संबन्धी रोगों) से छुटकारा मिलता है। इसका उपयोग सूखी और सर्द दोनों प्रकार की खांसियों के लिए लाभदायक होता है। यह छाती की हलचल (खरखराहट) और फेफड़ों की सूजन को खत्म करता है। हृदय की बीमारी और कामला (पीलिया) को ठीक करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। यह पथरी को भी गलाता है। 4 ग्राम कड़वा बादाम शहद के साथ खाने पर पागल कुत्ते के काटने का जहर समाप्त हो जाता है।

विभिन्न भाषाओं में नाम

संस्कृत : वाताद, वातवैरी आदि। 
हिन्दी : बादाम
बंगाली : बादाम
मराठी : बदाम, कड़वे बदाम
गुजराती : बदाम
फारसी : बदाम शोरी, बदाम तल्ख
अंग्रेजी : आलमण्ड
लैटिन : एमिग्ड्रेलस कम्युनीज 
  • गुण : बादाम गर्म, चिकना, वीर्य को बढ़ाने वाला तथा वात नाशक होती है। मीठी भीगी बादाम वीर्यवर्द्धक होती है तथा पित्त एवं वात को खत्म करती है तथा कफ को बढ़ाती है। इसका उपयोग रक्तपित्त के रोगियों के लिए हानिकारक होता है।
  • बादाम का तेल निकालना : बादाम को छीलकर थोड़ी देर तक पानी में रखकर उसके छिलके निकाल देते हैं और उसमें थोड़ी सी मिश्री बारीक मिलाकर पीस लेते हैं। इसके बाद उसे हाथ में लेकर दबाने से तेल निकलता है। यह तेल दिमाग को हल्का और ठंडा रखता है।
  • बादाम का हानिकारक प्रभाव : कड़वे बादाम में एक प्रकार का जहर होता है अत: यह ध्यान रखा जाना आवश्यक है कि इसका खाने में उपयोग न किया जाए। इसके अतिरिक्त रक्तविकार से पीड़ित लोगों के लिए लोगों के लिए भी बादाम का सेवन लाभकारी नहीं है।

विभिन्न रोगों में उपयोग

  • पागल कुत्ते के काटने पर : 4 ग्राम बादाम की मींगी की मात्रा को शहद के साथ मिलाकर खाने से पागल कुत्ते का जहर दूर हो जाता है।
  • दांतों का मंजन :
    1. बादाम का छिलका जलाकर उसमें नमक मिलाकर दांतों पर रगड़ने से दांत साफ और चमकीले हो जाते हैं। सुगन्ध के लिए इसमें कपूर और इलायची भी मिला लेते हैं।
    2. बादाम के फल के छिलके को जलाकर, कोयला बनाकर उसकी बुकनी 100 ग्राम लेनी चाहिए। इसमें माजूफल, छोटी इलायची के दाने, फुलाई हुई फिटकरी और कपूर का 10-10 ग्राम चूर्ण मिलाकर खरल में बारीक पीसकर सुरक्षित रख लेते हैं। इस दंत मंजन को दांतों पर घिसने से दांत साफ होते हैं तथा मसूढ़े भी मजबूत होते हैं।
    3. बादाम का छिलका जलाकर ढक दें। दूसरे दिन पीसें और जितनी राख हो उसका पांचवा भाग फिटकरी या सेंधानमक मिलाकर पीस लेते हैं। इस पाउडर से मंजन करने से दांत तो साफ होते ही हैं इसके साथ ही दांतों के सारे रोग भी दूर हो जाते हैं।
  • भिलावां (एक जंगली पेड़) से उठे हुए छालों : बादाम को घिसकर भिलावां (एक जंगली पेड़) से उठे हुए छालों पर लगाने से लाभ मिलता है।
  • कनखजूरे के कांटे चुभ जाने पर : कनखजूरे के कांटे चुभ जाने पर बादाम का तेल लगाने से लाभ मिलता है।
  • सिर का दर्द
    1. बादाम और केसर को गाय के घी में मिलाकर सिर में लगाना चाहिए या तीन दिन तक बादाम की खीर खानी चाहिए अथवा बादाम और घी को दूध में मिलाकर सिर में लगाना चाहिए। इससे सिर का दर्द कुछ ही समय में ठीक हो जाता है।
    2. बादाम और कपूर को दूध में पीसकर मस्तक पर उसका लेप करने से मस्तक का दर्द और सिर दर्द मिट जाता है। मस्तिष्क पर बादाम के तेल की मालिश करने से लाभ होता है।
    3. 10 ग्राम बादाम की गिरी, 1 ग्राम कपूर, 1 ग्राम केसर, मिश्री और गाय के घी को मिलाकर हल्की आग पर पकायें और केवल घी बाकी रहने पर इसे छानकर शीशी में भर कर रख लें इसको रोगी को देने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
    4. बादाम रोगन की सिर पर मालिश करने से सिर दर्द दूर हो जाता है।
    5. बादाम की एक गिरी को सरसों के तेल में पीसकर मलने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।
    6. 10 गिरी बादाम की, 6 ग्राम ब्राह्मी बूटी और 7 साबुत कालीमिर्च को रात को सोते समय भिगो दें और सुबह इनका छिलका उतार कर पीसकर ठंडाई बना लें और इसमें मिश्री मिलाकर 40 दिन तक लगातार पीने से किसी भी प्रकार का सिर का दर्द हो वह दूर हो जाता है।
    7. सिर में तेज दर्द होने पर बादाम के तेल की मालिश करने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
    8. बादाम के बीजों को सिरके के साथ पीसकर इसको गाढ़े पदार्थ के रूप में बना लें और जहां सिर में दर्द हो वहां पर इसे लगाने से सिर का दर्द, साइटिका और नशे का चढ़ना दूर हो जाता है।
    9. 10 गिरी बादाम की, 6 ग्राम ब्राह्मी बूटी और 7 साबुत कालीमिर्च को रात को सोते समय भिगो दें और सुबह इनका छिलका उतार कर पीसकर ठंडाई बना लें और इसमें मिश्री मिलाकर 40 दिन तक लगातार पीने से किसी भी प्रकार का सिर का दर्द हो वह दूर हो जाता है।
    10. सिर में तेज दर्द होने पर बादाम के तेल की मालिश करने से सिर का दर्द दूर हो जाता है।
    11. बादाम के बीजों को सिरके के साथ पीसकर इसको गाढ़े पदार्थ के रूप में बना लें और जहां सिर में दर्द हो वहां पर इसे लगाने से सिर का दर्द, साइटिका और नशे का चढ़ना दूर हो जाता है।
  • धातु वृद्धि के लिए :
    1. 15 ग्राम गाय के घी में 10 ग्राम मक्खन या ताजा खोवा, बादाम, चीनी, कंकोल, शहद और इलायची मिलाकर 7 दिन तक लेना चाहिए।
    2. बादाम की गिरी को गर्म पानी में भिगो देते हैं। इसके बाद बादाम के छिलके निकालकर बारीक पीस लेते हैं। इसे दूध में मिलाकर उबालें और खीर बनाएं। इसमें चीनी और घी मिलाकर खाने से बल और वीर्य की वृद्धि होती है और दिमाग भी तेज होता है।
  • बादाम की खीर : बादाम को रात के समय गर्म पानी में भिगोकर रख दें। सुबह के समय इसके छिलके निकालकर बारीक पीसकर दूध में मिला दें। फिर उसे उबालकर खीर बनाएं इस खीर को ज्यादा न उबालें, अन्यथा पाचक द्रव्य नष्ट हो जाते हैं। यह बादाम की खीर पाचक और उत्तेजक होती है। दिमाग की कमजोरी, दिमाग का दर्द और सिर के दर्द में यह खीर लाभकारी होती है। बादाम के खीर के सेवन की मात्रा 20 से 40 ग्राम तक है।
  • बादाम के लड्डू : 400 ग्राम बादाम की गरी, 100 ग्राम मावा, 600 ग्राम चीनी, 200 ग्राम घी, 40 ग्राम बिहीदाना, 20 ग्राम कमलगट्टे के बीज की गिरी, 10-10 ग्राम छोटी इलायची के दाने, दालचीनी, तमालपत्र, और 5-5 ग्राम नागकेशर, लौंग, बांस, कपूर, जायफल, जावित्री, और केसर लेते हैं। बादाम 1 घंटे तक गर्म पानी में भिगोकर रखें। इसके बाद बादाम के छिलके निकालकर बारीक पीस लेते हैं। पीसे हुए बादाम और मावा को अलग-अलग घी में सेंके। शक्कर की चासनी बनाकर उसमें उपरोक्त चीजों का चूर्ण मिलाएं फिर उसमें बादाम और मावा मिलाकर 40-40 ग्राम के लड्डू बना लेते हैं। रोजाना 1-1 लड्डू खाकर ऊपर से दूध पीना चाहिए। इस प्रयोग से बुखार के बाद की कमजोरी दूर हो जाती है। सर्दी के मौसम में यह लड्डू बहुत ही लाभकारी होता है।
  • बादाम का हरीरा : बादाम का हरीरा दिमागी ताकत को बढ़ाता है और चेहरे पर चमक लाता है।
    1. सामग्री : बादाम की गिरी, पिस्ता, चिलगोजा की गिरी, अखरोट की गिरी सफेद 10-10 ग्राम। 20 ग्राम खसखस, 20 ग्राम सूखा निशास्ता, 100 ग्राम मिश्री
    2. बनाने की विधि : खसखस और बादाम की गिरी को रात भर पानी में भिगोए रखें। सुबह बादाम की गिरी को छीलकर रखें तथा खसखस को पीसकर 400 मिलीलीटर पानी में भिगो देते हैं। बादाम की गिरी को बारीक पीस लेते हैं। अब खसखस का घोल, पिसी हुई मिश्री तथा बाकी बची हुई चीजों को मिलाकर हल्की आग पर गर्म करते हैं। घोल के रूप में हरीरा तैयार हो जाएगा।
    3. सेवन विधि : आयु, पाचन शक्ति और शारीरिक शक्ति का ध्यान रखते हुए इसका सेवन करना चाहिए। सर्दी के मौसम में रोजाना बादाम हरीरा का सेवन करते रहने से दिमाग को बहुत ताकत मिलता है। चेहरे का रूखापन दूर होकर लालिमा होती है। सिर में चक्कर आने की शिकायत मिटती है। बादाम मंहगे होने की वजह से यह योग खर्चीला होता है लेकिन यह बहुत अधिक लाभकारी होता है।
  • बादाम का हलुवा : 400 ग्राम देशी खांड या चीनी की चाशनी में रात को भिगोकर सुबह छीले हुए 10 बादाम को पीसकर चाशनी में मिलाकर हिलाते रहें। जब यह खूब मिल जाएं, तब घी डालकर पकाएं। बाद में छोटी इलायची के दाने पीसकर तथा चांदी का वर्क भी डालें। यह हलुवा शक्ति के अनुसार सेवन करने से बलवीर्य की खूब वृद्धि होती है तथा शरीर में तेज पैदा होता है।
  • बाजीकरण अनुभूत योग :
    1. असगंध, बड़े गोखरू, सालेमंपजा, सफेद मूसली, विदारीकंद, अकरकरा, शतावरी को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लेते हैं। इस चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम मिश्री मिले हुए गर्म दूध के साथ लेते रहने पर कामोत्तेजना जागृत होती है और स्तम्भन शक्ति में वृद्धि होती है। इस योग को सेब के रस के साथ मिलाकर 1 कप की मात्रा में रोजाना लेते रहने से पौरुष शक्ति की वृद्धि होने लगती है ।
    2. 500 ग्राम मुलहठी, 200 ग्राम आंवला चूर्ण, 200 ग्राम शुद्ध कौंच के बीज का चूर्ण, 200 ग्राम इमली के बीज की गिरी, 50 ग्राम छोटी पीपल को लेकर एकसाथ पीसकर एक जगह मिलाकर रख लेते हैं। 25 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम इसको लेकर मिश्री मिले हुए दूध के साथ खाते रहने से पुरुषों में अपूर्व कामशक्ति बढ़ती है। स्त्रियों की कामशिथिलता, स्तनों का ढीलापन, शीघ्रपतन आदि में भी यह प्रयोग लाभकारी होता है। इस प्रयोग के आधे घंटे बाद 1 गिलास सेब का जूस पीना लाभकारी होता है।
  • मस्तिष्क को शीतलता (ठंडक) प्रदान करने के लिए : बादाम को छीलकर आग पर सेंककर चीनी के साथ खाना चाहिए। इसके एक घन्टे के बाद मक्खन और चीनी खानी चाहिए। इसके बाद दिन में तीन बार बादाम का तेल सिर में लगाने से दिमाग मे ठंडक पैदा होती है।
  • शक्ति के लिए : 750 ग्राम बादाम, 250 ग्राम खोवा, डेढ़ किलो चीनी, 5-5 ग्राम जायफल और जावित्री, 5 ग्राम केसर, 5 ग्राम वंशलोचन, 5 ग्राम कमलाक्ष, 10 ग्राम इलायची, 10 ग्राम दालचीनी, 1 किलो तेजपात, 10 ग्राम नागकेसर, 45 ग्राम बिहीदाना और 3 ग्राम लौंग को लेकर एकसाथ बारीक पीस लेते हैं। इसके बाद बादाम और खोये को घी में भून लेते हैं। इसके पश्चात चीनी की चाशनी में सभी औषधियों को डालकर पका लेते हैं। इसको खाने से वीर्य की वृद्धि होती है। शरीर शक्तिशाली और मजबूत होता है। वायु रोग दूर होता है। बुखार खत्म होने के बाद जो कमजोरी शरीर में आती है उस समय इसको खाने से बहुत अधिक आराम मिलता है।
  • पेशाब में जलन : बादाम की 5 गिरी को पानी में भिगो दें। इसके बाद छीलकर इनमें 7 छोटी इलायची और स्वाद के अनुसार मिश्री मिलाकर तथा पीसकर 1 गिलास पानी में घोलकर सुबह-शाम दिन में दो बार पीने पेशाब की जलन में लाभ मिलता है।
  • मासिक-धर्म सम्बंधी विकार : 1 बादाम और छुहारा रात के समय पानी में भिगो दें। सुबह के समय दोनों को पीसकर मक्खन और मिश्री के साथ 3 महीने तक सेवन करने से मासिक-धर्म खुलकर आने लगता है।
  • स्मरणशक्तिवर्द्धक : 10 ग्राम बादाम को पानी को रात को भिगो दें और सुबह इसका छिलका उतारकर 12 ग्राम मक्खन और मिश्री मिलाकर 1-2 माह तक लगातार खाते रहने से मस्तिष्क की कमजोरी दूर होती है। यदि यह सम्भव न हो तो 40 दिनों तक 7 बादाम, 10 ग्राम मिश्री और सौंफ को पीसकर रात के सोते समय गर्म दूध के साथ पीने से दिमाग की कमजोरी दूर हो जाती है तथा आंखों की रोशनी बढ़ जाती है। यदि यह प्रयोग भी सम्भव न हो तो 10 ग्राम बादाम को बारीक पीसकर आधा किलो दूध में मिलाएं। जब दूध में 3 बार उबाल आ जाए तो इसे उतारकर, ठंडा करके चीनी मिलाकर पीना चाहिए। बादाम की गिरी और सौंफ समान मात्रा में बारीक पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच रात को सोते समय लेते हैं। इस प्रयोग से भी दिमाग की ताकत भी बढ़ती है इससे सिर दर्द और शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है।
  • आंखों के सभी प्रकार के रोग : आंखों से पानी गिरना, आंखें आना, आंखों की दुर्बलता, आंखों का थकना आदि रोगों में बादाम को भिगोकर सुबह के समय पीसकर पानी मिलाकर पी जाएं तथा ऊपर से दूध पीने से लाभ होता है।
  • चेचक : 5 बादाम को पानी में सुबह के समय पीने से चेचक के दाने शीघ्र भर जाते हैं एवं जल्दी ठीक भी हो जाते हैं।
  • वीर्यस्खलन : जिनका वीर्य सम्भोग (मैथुन) प्रारम्भ करते ही निकल जाता हो, उन्हें 6 बादाम, कालीमिर्च के दाने, 2 ग्राम सोंठ और मिश्री को लेकर इन सभी को मिलाकर चबाकर खाने के बाद ऊपर से दूध पीना लाभकारी होता है।
  • पीलिया : 6 बादाम, 3 छोटी इलायची और 20 छुहारे लेकर रात के समय मिट्टी के कुल्हड़ में भिगो दें तथा सुबह के समय इन सबको बारीक पीसकर इसमें 70 ग्राम मिश्री, 50 ग्राम मक्खन मिलाकर चाटने से पीलिया के रोग में लाभ मिलता है। इस प्रयोग के करने से तीसरे दिन ही पेशाब साफ आने लग जाएगा।
  • झांइयां, दाग-धब्बे: 5 बादाम की गिरी को रात को पानी में भिगों दें, सुबह इनका छिलका उतारकर बहुत बारीक पीसकर शीशी में भरकर रख दें। फिर इसमें 60 ग्राम गुलाबजल, 15 बूंद चन्दन का इत्र (परफ्यूम) मिलाकर हिलाएं। चेहरे या बदन पर जहां कहीं भी काले धब्बे, झांइयां हों वहां इसे रोजाना दिन में 3 बार लगाना चाहिए। जहां गहरा धब्बा हो वहां इसे अधिक मात्रा में लगा देते हैं। इस प्रयोग से झाइयों और दाग-धब्बों में लाभ मिलता है।
  • मोटापा बढ़ाना : 12 बादाम की गिरी को रात को पानी में भिगो दें। सुबह उठने पर इनका छिलका उतारकर पीस लें, फिर इसमें एक ग्राम मक्खन और थोड़ी सी चीनी मिलाकर डबल रोटी के साथ खाएं ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पी लें। इस प्रयोग को लगातार 6 महीने तक करने से मोटापा बढ़ता है। इससे शारीरिक शक्ति भी बढ़ती है और दिमाग भी तेज होता है।
  • सूखी खांसी : बादाम खाने से गला तर रहता है तथा खांसी में लाभ होता है। बार-बार खांसी उठती है, लेकिन कफ बाहर नहीं आता हो तो 5 बादाम को भिगो दें। फिर उन्हें छीलकर उतनी ही मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दिन में 2 बार चांटे। इससे सूखी खांसी में लाभ मिलता है। 
    सूखी खांसी में बादाम को मुंह में रखकर चूसने से गला तर रहता है और सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
  • हकलाना, तुतलाना :
    1. रोजाना रात को 12 बादाम भिगोकर फिर छीलकर और पीसकर 25 ग्राम मक्खन मिलाकर कुछ महीने तक लगातार सेवन करने से हकलाना व तुतलाना ठीक हो जाता है। साथ ही रोगी को धीरे-धीरे बोलने तथा बिना घबराहट के बोलने की कोशिश भी करनी चाहिए। बादाम की 10 गिरी और कालीमिर्च को लेकर बहुत बारीक पीसकर मिलाकर चाटना भी तुतलाने व हकलाने में लाभकारी होता है।
    2. रोजाना 10 से 12 बादाम पानी में भिगोकर रख दें। बादाम के फूल जाने पर छिलका उतारकर इसकी गिरी को पीस लें और इसकी 25 से 30 ग्राम मात्रा को मक्खन में मिलाकर खायें। कुछ महीनों तक इसका सेवन करने से तुतलापन ठीक हो जाता है।
  • वीर्यवर्द्धक : 12 बादामों की गिरियां रात के समय पानी में भिगो दें और उसे सुबह के समय पीस लें। इसके बाद कलाई वाली पीतल की कड़ाही में घी डालकर उसमें पीसे हुए बादामों को डालकर सेंके। लाल होने पर इसमें लगभग 125 मिलीलीटर दूध डालें। इस दूध को गर्म-गर्म पीने से शरीर मजबूत होता है वीर्य बढ़ता है और कमजोरी भी दूर होती है।
  • दांत खट्टे होना अथवा होंठों का फटना : दांत खट्टे होना अथवा होंठों के फटने पर 5 बादाम को खाने से लाभ मिलता है।
  • दांतों का दर्द : 40 ग्राम बादाम के छिलके, 20 ग्राम कालीमिर्च, 20 ग्राम फिटकरी, 20 ग्राम रुमीमस्तांगी तथा काजू को एकसाथ मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। यह मंजन रोजाना करने से दांतों से खून का निकलना बंद हो जाता है और दांतों का हिलना भी बंद हो जाता है।
  • दांत साफ और चमकदार करना :
    1. बादाम का छिलका जलाकर किसी बर्तन से ढक दें। दूसरे दिन इसकी राख को पांच गुना फिटकरी के साथ मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। इससे रोजाना मंजन करने से दांत साफ, चमकदार तथा मजबूत बनते हैं।
    2. बादाम के छिलके को जला लें तथा इसकी राख को सैंधानमक के साथ मिलाकर बारीक पीसकर मंजन बना लें। यह मंजन रोजाना करने से दांत साफ और मजबूत होते हैं।
  • खांसी : 5 बादाम की गिरी, 20 दाने कालीमिर्च, 4 लौंग और आधा चम्मच सोंठ को लेकर पानी में डालकर काढ़ा बनाकर पीने से खांसी के रोग में लाभ मिलता है।
  • कब्ज : 15 ग्राम बादाम के तेल को निकालकर 1 गिलास दूध में मिलाकर कुछ दिनों तक लगातार पीने से पेट की गैस और कब्ज में आराम मिलता है।
  • गर्भाशय की सूजन : बादाम रोगन एक चम्मच, शर्बत बनफ्सा 3 चम्मच चीनी पानी में मिलाकर सुबह के समय पीएं तथा बादाम रोगन का एक फोया गर्भाशय के मुंह पर रखें इससे गर्मी के कारण उत्पन्न गर्भाशय की सूजन ठीक हो जाती है।
  • नपुंसकता :
    1. दाम 5 गिरी, खांड (शक्कर) के साथ सुबह-शाम एक हफ्ते तक प्रयोग करने से नपुंसकता के रोग में लाभ होता है।
    2. बादाम को गरम पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज पीयें इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।
  • मुंह का सौन्दर्य : होंठों पर अगर काली परत छा गई हो तो 1 बादाम और 1 केसर की पत्ती को पानी के साथ पीसकर मिश्रण तैयार कर लें। इसके मिश्रण को होंठों पर लगाकर 10 मिनट तक छोड़ दें। 10 मिनट के बाद होंठों को अंगुली से थोड़ा रगड़कर लेप उतार दें। कुछ दिन तक इसका लगातार प्रयोग करने से होंठों की काली परत मिटकर होंठों पर गुलाबी रंगत आ जाती है।
  • हिचकी का रोग : 5-5 ग्राम बादाम की गिरी और कालीमिर्च को पानी के साथ पीसकर उसमें चीनी मिलाकर सुबह-शाम पीने से हिचकी में लाभ होता है।
  • कमरदर्द :
    1. बादाम के तेल की मालिश कमर पर तीन बार करने से कमर दर्द 1 सप्ताह में ठीक हो जाता है।
    2. बादाम को रात में पानी भिगों दें। सुबह कुछ देर तक पकाकर इसका पेय बना लें। इस पेय को 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से स्त्रियों के कमर दर्द में लाभ होता है। यह श्वेत प्रदर में भी कमर दर्द को काफी लाभ पहुंचाता है।
  • बवासीर (अर्श) : 10 ग्राम बादाम, आंवला, 6-6 ग्राम हल्दी, भांग और 10 ग्राम मैदा को एक साथ पीसकर गुनगुना करके बवासीर पर बांधने से अर्श (बवासीर) रोग ठीक होता है।
  • बहरापन :
    1. बादाम के तेल के साथ जबाद कस्तूरी को पीसकर कान में डालने से धीरे-धीरे बहरापन दूर हो जाता है और सुनने की शक्ति भी बढ़ती है।
    2. कड़वे बादाम के तेल को गुनगुना करके रोजाना सुबह और शाम कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरेपन के रोग में लाभ होता है।
    3. 100 मिलीलीटर बादाम के तेल में लहसुन की 10 कलियों को डालकर पका लें। जब पकने पर लहसुन की कलियां जल जायें तो इस तेल को छानकर कान में बूंद-बूंद करके डालने से बहरापन दूर होने लगता है।
  • कमजोरी :
    1. पीले बादाम की मींगी, निशास्ता, कतीरा और चीनी इन्हें बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें और इसे रोजाना 10 ग्राम दूध के साथ सेवन करने से शरीर की कमजोरी मिट जाती है।
    2. बादाम की गिरी को रात को पानी में भिगो दें। उसे सुबह छीलकर मक्खन के साथ चबा-चबाकर खाने से कमजोरी दूर हो जाती है।
    3. 4 बादाम, 2 छुहारा और 8 मुनक्का को शाम को पानी में भिगो दें। सुबह छुहारे की गुठली, बादाम का छिलका और मुनक्के के बीज अलग कर दें और बाकी चीजों को बारीक पीसकर, इसमें शुद्ध घी मिलाकर रोजाना सेवन करने से कमजोरी मिट जाती है।
  • पित्ताशय की पथरी : 6 बादाम की गिरी, 6 मुनक्का, 4 ग्राम मगज खरबूजा, 2 छोटी इलायची और 100 ग्राम मिश्री को बारीक पीसकर आधा कप पानी में मिलाकर छान लें और इसे पित्ताशय के रोगी को दें, इससे पित्ताशय की पथरी से आराम मिलता है।
  • प्रदर रोग :
    1. बादाम को गाय के दूध के साथ सेवन करने से प्रदर रोग मिट जाता है।
    2. बादाम को रात में गर्म पानी में भिगो दें। सुबह इसे कुछ देर पकाकर रस बनाकर 20-40 मिलीलीटर मात्रा में सेवन करने से सफेद प्रदर और इससे पैदा हुआ कमर दर्द सही हो जाता है।
  • प्रसव पीड़ा : गर्भावस्था के आखिरी महीने में प्रसूता को 2 बादाम और 10-15 मुनक्का के दाने पानी में भिगोकर तथा उन्हें पीसकर खिलाना चाहिए। इससे प्रसव के समय पीड़ा नहीं होती है।
  • मधुमेह : बादाम, कालीमिर्च की ठंडाई और शहद को एक साथ मिलाकर शीतल पेय बनाकर देने से मधुमेह के रोगी को ठंड का एहसास होता है। ध्यान रहे यह प्रयोग रोगी को ठंड अधिक पसन्द हो तो करना चाहिए।
  • नींद न आना (अनिद्रा) :
    1. घिया का तेल और बादाम रोगन की सिर में मालिश करने से नींद अच्छी आती है।
    2. बादाम रोगन, खसखस का तेल और काहू के तेल को मिलाकर कनपटी पर मालिश करने से नींद अच्छी तरह से आती है।
  • आधासीसी (माइग्रेन) अधकपारी : लगभग 10 दाने कागजी बादाम, 10 ग्राम पोस्त (खस-खस) और 5 दाने छुहारे इन सबको पानी में डालकर रख दें। सुबह इस मिश्रण को घी में डालकर हलुवे की तरह पकायें और इसमें मिश्री 100 ग्राम, 10 लौंग और 5 इलायची का चूर्ण बनाकर इसमें मिलाकर सुबह शाम देने से आधासीसी का दर्द खत्म हो जाता है।
  • वीर्य के दोष में : कालीमिर्च और बादाम की गिरी को बराबर मात्रा में लें और इसमें थोड़ी सी सोंठ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को भोजन के बाद गर्म दूध के साथ खाने से वीर्य की कमी का रोग दूर हो जाता है।
  • बहुमूत्र रोग : 5 बादाम की गिरी को चीनी के साथ सुबह और शाम खाने से बहुमूत्र (बार-बार पेशाब आना) के रोग में लाभ होता है।
  • मूत्ररोग : बादाम पेशाब को तरल बनाने वाला होता है। इसलिए रोज खाने से यह पथरी को भी गला देता है।
  • दिमाग के कीड़े :
    1. बादाम की 10 गिरी, 6 ग्राम ब्राह्मी बूटी और 7 दाने कालीमिर्च लें। बादाम का छिलका निकालकर इन तीनों को सिल पर पीस लें और ठंडाई की तरह पानी में छानकर, इसमें मिश्री मिलाकर 40 दिन तक रोगी को पिलाने से याददाश्त मजबूत होती है।
    2. लगभग 30-30 ग्राम बादाम की गिरी, बनफ्सा, धनिया, गुलाब के फूल और लगभग 15-15 ग्राम बालछड़ और उस्तखदूस को कूट छानकर इन दोनों मिश्रणों को मिलाकर लगभग 10 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय दूध के साथ लेने से दिमाग ताकतवर बन जाता है।
  • आंत्रवृद्धि का बढ़ना : बादाम की 5 गिरी को चीनी के साथ सुबह-शाम लगातार एक हफ्ते तक खाने से आंत्रवृद्धि का बढ़ना रुक जाता है।
  • पेशाब में धातु का आना : बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और कालीमिर्च को पीसकर चूर्ण बनाकर कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का रोग ठीक हो जाता है।
  • सिर चकराना : गर्मी के दिनों में रात को 3-4 बादाम पानी में डालकर रख दें और सुबह उठकर बादाम का छिलका उतारकर बादामों को पीसकर दूध के साथ खाने से दिमाग की कमजोरी दूर होने के साथ ही साथ सिर चकराने का रोग भी दूर हो जाता है।
  • त्वचा के रोग के लिए : बादाम को सिरके के साथ पीसकर पकाकर लेप बना लें और इस लेप को शरीर में जहां पर खुजली हो वहां पर लगाने से लाभ होता है।
  • निम्न रक्तचाप
    1. बादाम की 3 गिरी रात को पानी में डालकर रखें और सुबह उठकर बादामों को साफ सिल पर घिसकर, चाटकर सेवन करने से निम्न रक्तचाप के रोग में बहुत लाभ होता है। अगर बादाम को घिसकर खाने में कोई परेशानी होती हो तो इसे पीसकर सेवन कर सकते हैं।
    2. रात को पानी में बादाम की 3 गिरी भिगोकर रख दें। सुबह बादाम को पीसकर 50 ग्राम मक्खन और 10 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर खाने से और उसके ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पीने से निम्न रक्तचाप यानी लो ब्लड प्रेशर में बहुत लाभ होता है।
  • नाखून का जख्म : नाखून का जख्म नाखून के उखड़ने के कारण हो तो पहले नाखूनों को गर्म पानी से अच्छी तरह से धो लें। उसके बाद 10-10 ग्राम घी, हल्दी और बादाम को अच्छी तरह से पीसकर नाखूनों पर लगाने से नाखूनों का दर्द और जख्म मिट जाता है।
  • पीलिया का रोग :
    1. 8 बादाम की गिरी, 5 छोटी इलायची और 2 छुहारों को रात में मिट्टी के बर्तन में भिगो लें और सुबह निकालकर छुहारे की गुठली, इलाइची व बादाम के छिलके फेंक दें। शेष सभी चीजों को बहुत अच्छी तरह पीस लें। इसके बाद इसे लगभग 70 ग्राम के मक्खन के साथ सेवन करने से शीघ्र ही पीलिया के रोग में लाभ होने लगता है।
    2. 8 बादाम, 5 छोटी इलायची और 2 छुहारों को रात को मिट्टी के बर्तन में भिगों दें। फिर इन सबको सुबह बारीक पीसकर इसमें 70 ग्राम मिश्री, 70 ग्राम मक्खन मिलाकर पीलिया के रोगी को चटाने से 4 दिन में ही पीलिया के रोग में लाभ होता है।
  • मानसिक उन्माद (पागलपन) : बादाम की 8 गिरी को रात को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह उनके छिलके उतारकर उसी पानी के साथ पीसकर 200 मिलीलीटर दूध के साथ पागलपन के रोगी को पिलाने से पागलपन दूर हो जाता है। इससे दिमाग भी काबू में रहता है।
  • होठों के लिए :
    1. 20 ग्राम बादाम रोगन को आग पर रखकर बहुत ज्यादा गर्म करके इसके अंदर 5 ग्राम देशी मोम डालकर पिघला लें। फिर इसे नीचे उतारकर इसमें 2 ग्राम सफेद कत्था और सुरमा डालकर मिला लें। इसे होठों पर लगाने से होंठों का फटना, पपड़ी उतरना (होठों की खाल उतरना) और कुरंड रोग ठीक हो जाता है और होंठ बिल्कुल कोमल और चिकने हो जाते हैं।
    2. 5 बादाम रोजाना सुबह और शाम खाने से होठ नहीं फटते हैं।
    3. रात को सोते समय होठों पर बादाम रोगन लगाकर सो जाएं। इससे होठों की पपड़ी हट जायेगी और होठ मुलायम हो जायेंगे और आगे से होठों पर पपड़ी भी नहीं जमेगी। हमेशा ध्यान रखें कि होठों पर जमी हुई पपड़ी को नाखून या दांत से कभी नहीं नोचे और मुंह से सांस न लें।
  • बालरोग : बादाम में चूना, लोहा, फासफोरस ज्यादा पाया जाता है जो बच्चों की हिड्डयों को मजबूत करता है। दूध पीने वाले बच्चों के लिए रात को 1 बादाम भिगो दें सुबह बादाम को पीसकर दूध में मिलाकर बच्चे को पिला दें। जहां तक हो सके बच्चों को दवाइयां नहीं देनी चाहिए। खाने-पीने की सामान्य चीजों से ही चिकित्सा करनी चाहिए।
  • याददाश्त का कमजोर होना :
    1. जब मनुष्य की याददाश्त कमजोर हो जाती है तो उसके लिए 7 दाने बादाम के शाम को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह छिलका उतारकर बारीक पीस लें यदि रोगी की आंखें भी कमजोर हो तो 4 कालीमिर्च को भी पीसकर 250 मिलीलीटर दूध में मिलाकर दूध को 3 बार उबाल लें और नीचे उतारकर 1 चम्मच देशी घी में और दो चम्मच बूरा या चीनी मिलाकर पीने से दिमाग और बुद्धि की कमजोरी दूर हो जाती है और याददाश्त बहुत मजबूत हो जाती है। इस प्रकार का दूध 15 दिन से 40 दिन तक पीने से याददाश्त तेज हो जाती है।
    2. बादाम की गिरी को चन्दन की तरह बारीक करके या खूब चबाकर मलाई की तरह मुलायम बनाकर खाने से बादाम आसानी से पच जाता है और याददाश्त में अधिक लाभ पहुंचता है।
    3. 7 बादाम की गिरियों को शाम को भिगोकर सुबह उसका छिलका उतारकर 1-1 बादाम को सुबह खूब चबाकर खाने से और इसके ऊपर से गर्म दूध पीने से याददाश्त तो बढ़ती ही है साथ ही आंखों की रोशनी भी तेज हो जाती है।
    4. बादाम की 10 गिरी लेकर उसको रात को भिगोकर रख दें और सुबह इनका छिलका उतार कर लगभग 12 ग्राम मक्खन और मिश्री मिलाकर एक या दो महीने तक खाने से दिमाग की कमजोरी दूर हो जाती है और भूलने की आदत खत्म हो जाती है।
    5. लगभग 10-10 ग्राम की मात्रा में बादाम, सौंफ और मिश्री को पीसकर रात को सोते समय गर्म दूध के साथ लेने से दिमाग की कमजोरी दूर हो जाती है और इसका सेवन लगातार 40 दिन तक करना चाहिए।
    6. बादाम की गिरी और सौंफ को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, और रात को सोते समय ठंडे पानी से लेने से याददास्त बढ़ती है।
  • सांस के रोग : बादाम को गर्म पानी में डालकर शाम के समय रात भर के लिए भिगोकर रख देते हैं। दूसरे दिन सुबह बादाम को थोड़ी देर पकाकर उसका पेय बना लेते हैं। इस पेय को 20 से 40 मिलीलीटर तक की मात्रा में रोजाना सेवन करने से सांस के सारे रोग ठीक हो जाते हैं।
  • दमा : 5-7 बादामों की मींगी को पीसकर पानी में डालकर आग पर कुछ देर तक उबालें। यह काढ़ा थोड़ा-थोड़ा रोगी को पिलाने से दमा का दौरा रुक जाता है।
  • काली खांसी (कुकर खांसी) : रात को 3 बादाम पानी में डालकर रख दें। सुबह उठकर बादाम के छिलके निकालकर लहसुन की एक कली और मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इस मिश्रण को रोगी बच्चों को खिलाने से काली खांसी दूर हो जाती है।
  • शरीर को शक्तिशाली बनाना :
    1. शरीर की शक्ति को बढ़ाने के लिए बादाम की गिरी और भुने हुए चनों को छीलकर रोजाना खाना चाहिए।
    2. लगभग 4 बादाम की गिरियों को पीसकर इसमें 1-1 ग्राम की मात्रा में शहद और मिश्री को मिलाकर चाटने से मनुष्य के शरीर में ताकत बढ़ जाती है।
    3. लगभग 7 बादाम की गिरी, 7 दाने काली मिर्च के, 3 ग्राम सौंफ (गर्मियों के मौसम में सौंफ के स्थान पर सूखा हुआ साबूत धनिया) और 2 छोटी इलायची को लेकर शाम को सोते समय कांच या चीनी के बर्तन में भिगोकर रख दें। सुबह उठकर व्यायाम करने के बाद बादाम और इलायची के छिलके उतार लें और काली मिर्च और सौंफ के साथ इनको पीस लें। फिर इनको बारीक पीस लें और 250 मिलीलीटर पानी में मिलाकर कपड़े से छान लें। इसके बाद इसमें 2 चम्मच शहद या मिश्री मिलाकर धीरे-धीरे पीने से दिमाग की याददाश्त मजबूत होती है और आंखों की रोशनी तेज होने के साथ-साथ शरीर की शक्ति भी बढ़ती है।
    4. बादाम की गिरी में से निकाला गया दूध पिलाना बच्चों के लिए बहुत लाभकारी होता है।
    5. लगभग 10 बादाम की गिरियों को शाम को पानी में भिगोकर रख दें। इसके बाद सुबह इनका छिलका उतार कर बारीक पीस लें। अब इन पीसे हुए बादामों में मक्खन मिलाकर कुछ महीने तक खाने से तुतलाने और हकलाने का रोग दूर हो जाता है। इसके अलावा इसका सेवन करने से कमजोर शरीर भी मजबूत बनता है।
    6. शाम को सोते समय लगभग 10 बादामों की गिरी को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इनका छिलका उतार कर बारीक पीस लें। अब एक कड़ाई में घी डालकर उसमें बादाम डालकर हल्की आग पर भून लें। इसके लाल होने से पहले ही लगभग 150 मिलीलीटर की मात्रा में दूध डालें। इस दूध को रोजाना सुबह हल्का गर्म करके पीने से शरीर शक्तिशाली बनता है। इसके अलावा शरीर का वीर्य बल भी बढ़ता है।
  • गर्दन में दर्द : गर्दन पर बादाम के तेल की मालिश करने से 10 घंटे के अंदर गर्दन का दर्द चला जाता है।
  • बंद आवाज खोलना : 7 बादाम की गिरी और 7 कालीमिर्च को थोड़े से पानी में डालकर और उसमें थोड़ी सी पिसी हुई चीनी मिलाकर चाटने से खुश्की की वजह से बंद हुई आवाज खुल जाती है।
  • बच्चों का सही पालन पोषण : बादाम की एक गिरी को रात में पानी में भिगोकर रख दें। सुबह उठने पर बादाम को किसी साफ पत्थर पर चन्दन की तरह बिल्कुल बारीक पीसकर अपनी अंगुली से धीरे-धीरे बच्चे को चटा दें। इससे बच्चे का दिल-दिमाग अच्छा बना रहता है और बच्चा खुशमिजाज रहता है।
  • गले के रोग में : रोजाना 12 बादाम भिगोकर उन्हें छीलकर और फिर पीसकर लगभग 30 ग्राम मक्खन के साथ मिलाकर कुछ समय तक खाने से तुतलाना (आवाज साफ न निकलना) और हकलाना (अटक-अटक कर बोलना) ठीक हो जाता है।